ट्रंप की शर्तें सख्त: वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका की नजर
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Venezuela-Ccrisis
अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल साझेदारी पर एकाधिकार की मांग की.
चीन, रूस, ईरान और क्यूबा से संबंध खत्म करने की शर्त.
तेल संकट से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव.
Venezuela / अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वेनेजुएला को लेकर रणनीति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला की नई अंतरिम सरकार के सामने कड़ी शर्तें रखी हैं। अमेरिका साफ तौर पर चाहता है कि वेनेजुएला चीन, रूस, ईरान और क्यूबा जैसे देशों के साथ अपने आर्थिक रिश्ते पूरी तरह खत्म करे। तभी उसे अपने तेल भंडार से ज्यादा उत्पादन करने की अनुमति दी जाएगी।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिका की दूसरी बड़ी शर्त यह है कि वेनेजुएला तेल उत्पादन के लिए केवल अमेरिका के साथ ही साझेदारी करे। इसके साथ ही, कच्चा तेल बेचते समय अमेरिका को प्राथमिकता दी जाए। यानी वेनेजुएला का तेल व्यापार पूरी तरह अमेरिकी हितों के अनुरूप हो।
गौरतलब है कि हालिया अमेरिकी हमलों के बाद से वेनेजुएला गंभीर राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। अमेरिकी कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका लाया गया, जिसके बाद डेल्सी रोड्रिग्ज ने अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि दक्षिण अमेरिकी देश पर उनका प्रभाव और नियंत्रण है।
एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के नए नेतृत्व को साफ संदेश दिया है कि अगर वह अपने तेल भंडार का पूरा इस्तेमाल करना चाहता है तो उसे अमेरिकी शर्तें माननी होंगी। सूत्रों का कहना है कि सबसे पहले वेनेजुएला को चीन, रूस, ईरान और क्यूबा को देश से “बाहर” करना होगा और उनके साथ सभी आर्थिक संबंध खत्म करने होंगे। इसके बाद ही तेल उत्पादन और निर्यात को लेकर किसी तरह की छूट मिल सकती है।
चीन लंबे समय से वेनेजुएला का करीबी सहयोगी रहा है और वह उसका सबसे बड़ा तेल खरीदार भी रहा है। ऐसे में चीन के साथ रिश्ते तोड़ने की शर्त वेनेजुएला के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। इसी बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सांसदों को एक निजी ब्रीफिंग में बताया है कि अमेरिका वेनेजुएला पर दबाव बनाने की स्थिति में है, क्योंकि इस समय उसके तेल टैंकर पहले से भरे हुए हैं और नया तेल रखने की जगह नहीं बची है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर के अंत में वेनेजुएला ने कई तेल कुएं बंद करना शुरू कर दिए थे। अमेरिकी नाकेबंदी के कारण तेल के भंडारण की समस्या इतनी गंभीर हो गई कि उत्पादन जारी रखना संभव नहीं रह गया। अगर और कुएं बंद होते हैं तो इससे वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाना बेहद मुश्किल हो सकता है। इसके साथ ही, अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज की सत्ता पर पकड़ भी कमजोर पड़ने की आशंका है।
एबीसी न्यूज से बातचीत में सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन रोजर विकर ने भी इस बात की पुष्टि की कि अमेरिका की पूरी योजना वेनेजुएला के तेल पर नियंत्रण हासिल करने पर केंद्रित है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए अमेरिकी सैनिकों की तैनाती जरूरी नहीं समझी जा रही है।
अमेरिकी खुफिया आकलनों के अनुसार, काराकास के पास अपने तेल भंडार को बेचे बिना आर्थिक रूप से दिवालिया होने से पहले केवल कुछ ही हफ्तों का समय बचा है। ऐसे में वेनेजुएला के सामने अब यह बड़ा सवाल है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे झुकता है या फिर अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ खड़ा रहता है। आने वाले दिनों में इस टकराव का असर न सिर्फ वेनेजुएला बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ दिखाई दे सकता है।